UP Outsourcing: आउटसोर्सिंग भर्तियों की होगी जांच, समाज कल्याण विभाग का बड़ा फैसला

UP Outsourcing: उत्तर प्रदेश में समाज कल्याण विभाग द्वारा की गई आउटसोर्सिंग भर्तियों को लेकर बड़ा कदम उठाया गया है। विभाग ने आउटसोर्सिंग के माध्यम से रखे गए 460 कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया की जांच कराने का फैसला किया है। इसमें कंप्यूटर ऑपरेटर, कंप्यूटर प्रोग्रामर और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी शामिल हैं। यह निर्णय मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के तहत संचालित अभ्युदय कोचिंग में अयोग्य कोर्स कोआर्डिनेटरों की भर्ती का मामला सामने आने के बाद लिया गया है।

किन-किन भर्तियों की होगी जांच

समाज कल्याण विभाग के अनुसार, जिन भर्तियों की जांच की जाएगी, वे आश्रम पद्धति स्कूलों, अभ्युदय कोचिंग, छात्रवृत्ति योजना और मंडलीय कार्यालयों में की गई हैं। विभाग की ओर से जांच के लिए संबंधित अधिकारियों को पत्र भी जारी कर दिया गया है। जांच के दौरान यह परखा जाएगा कि भर्ती के लिए निर्धारित अर्हता मानकों का पालन किया गया या नहीं।

भर्ती प्रक्रिया पर उठे सवाल

जांच में यह भी देखा जाएगा कि जिन पदों के लिए भर्ती की गई, उनके लिए तय की गई चयन प्रक्रिया का सही तरीके से पालन हुआ या नहीं। यदि किसी स्तर पर नियमों की अनदेखी या गड़बड़ी पाई जाती है, तो संबंधित एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है। विभाग का मानना है कि पारदर्शिता बनाए रखना बेहद जरूरी है, खासकर तब जब सार्वजनिक धन से मानदेय दिया जा रहा हो।

पदों की संख्या और मानदेय

आउटसोर्सिंग के तहत 300 कंप्यूटर ऑपरेटर, 150 मल्टी टास्क सर्विसेज (एमटीएस) के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और 10 कंप्यूटर प्रोग्रामर रखे गए हैं। कंप्यूटर ऑपरेटरों को 18,000 रुपये प्रति माह, कंप्यूटर प्रोग्रामरों को 60,000 रुपये तक मासिक मानदेय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को 10,000 रुपये तक प्रति माह का भुगतान किया जा रहा है।

समाज कल्याण विभाग का यह कदम सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

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